एग्री स्टैक डीपीआई: डिजिटल प्रणाली के जरिए भारतीय कृषि का परिदृश्य बदल रही है
भारत में अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार कृषि क्षेत्र है जो अभी अकुशलता, अपर्याप्त ऋण, बाजार तक कम पहुंच और गुणवत्तापूर्ण साधन के अल्प निवेश और संसाधनों की सीमित उपलब्धता जैसी चुनौतियों का लगातार सामना कर रहा है। डिजिटल कृषि मिशन के तहत किसान केंद्रित बुनियादी ढांचा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) यानी एग्री स्टैक का आरंभ इस दिशा में एक बड़ा बदलाव ला रहा है। एग्री स्टैक, व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा निजी नवाचार को बढ़ावा देते हुए किसानों के लिए मापीय, अंत:प्रचालनीय और समावेशी समाधान प्रदान करता है।
एग्री स्टैक डीपीआई को शासन, सेवा वितरण और समावेशिता में सुधार लाकर संपूर्ण कृषि मूल्य श्रृंखला को बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी के उपयोग से पारदर्शी, कुशल और संवहनीय डिजिटल कृषि पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करना है।

चित्र 1: सरकार, कृषि तकनीक और अन्य संस्थाओं द्वारा किसानों को डिजिटल समाधान प्रदान करने की सुविधा के लिए डीपीआई दृष्टिकोण के अनुरूप ‘ केंद्र में किसान ‘
डीपीआई में एग्री स्टैक के प्रमुख घटक
एग्री स्टैक को कृषि क्षेत्र में अंतर-संचालनीयता, मापनीयता, पुन: प्रयोज्यता और निजी नवाचार के मूल सिद्धांतों के आधार पर तैयार किया गया है-
- डिजिटल पहचान प्रणाली: एग्री स्टैक में किसान रजिस्ट्री डेटा बेस, भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र और बोई गई फसल की रजिस्ट्री शामिल है। इसके अंतर्गत विश्वसनीय डिजिटल पहचान के लिए 11 अंकों की अनूठी संख्या के किसान आईडी के साथ ही जनसांख्यिकीय जानकारी और उनकी भूमि जोत और मौसमी फसल संबंधी आंकड़े शामिल किए गए हैं।

चित्र 2: किसान पहचान पत्र के रूप में एग्री स्टैक डीवीसी (डिजिटल रूप से सत्यापित क्रेडेंशियल) का उपयोग करते किसान
अभी देश भर में 1 करोड़ किसानों के लिए डिजिटल पहचान बनाई गई है। मार्च 2025 के अंत तक 6 करोड़ किसानों को इसमें शामिल करने की योजना है।

Figure 3:Status of Agri Stack Core Registries across India
· सहायक रजिस्ट्रियां: देश भर में कृषि डेटा के समरूप मानकीकरण के लिए फसल रजिस्ट्री, बीज रजिस्ट्री, कीटनाशक रजिस्ट्री आदि सहित 30 से अधिक सहायक रजिस्ट्रियां बनाई जा रही हैं। अभी विभिन्न उपयोगों के लिए फसल बीमा, फसल क्षेत्र अनुमान, फसल खरीद आदि की 14 सहायक रजिस्ट्रियां काम कर रही हैं।
- सहमति प्रबंधक: सहमति प्रबंधक डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुरूप किसानों की सहमति से इन्हें साझा करने और रद्द करने संबंधी नियंत्रण रखते हुए सहमति से डेटा साझाकरण सुनिश्चित करता है।

चित्र 4: डीपीडीपी अधिनियम 2023 के अनुपालन में एग्री स्टैक
- एकीकृत किसान सेवा इंटरफेस: एकीकृत किसान सेवा इंटरफेस (यूएफएसआई) विषम प्रणालियों में निर्बाध सूचना आदान प्रदान के प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। यह उसी तरह करता है जैसे यूपीआई बैंकों के बीच लेनदेन की सुविधा प्रदान करता है। प्रत्येक सीबीएस में अलग-अलग संरचना और प्रणालियां हो सकती हैं। यह नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है-

चित्र 3: एपीआई के माध्यम से डेटा के आदान-प्रदान के लिए यूएफएसआई-यूपीआई सादृश्य
केंद्रीय संरचना पर आधारित, यूएफएसआई सुरक्षित और गोपनीयता रखते हुए डेटा साझाकरण सुनिश्चित करता है। साथ ही यह राज्यों और कृषकों का अपने डेटा पर नियंत्रण सशक्त बनाता है।
डीपीआई के सिद्धांतों के अनुसार कृषि स्टैक अनुपालन

चित्र 5: एग्री स्टैक उन प्रश्नों के उत्तर देता है, जो कई हितधारक अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए जानना चाहते हैं, जैसे सरकारें, निजी क्षेत्र, शिक्षा जगत आदि।
एग्री स्टैक का डिज़ाइन डीपीआई के सिद्धांतों का पालन करता है:
1. हितधारकों के बीच उपयोगिता: किसान रजिस्ट्री और बोई गई फसल संबंधी रजिस्ट्री, ऋण, बीमा, सलाहकार सेवा आदि कई योजनाओं में सहायक है।
2. डिजाइन द्वारा अंत:प्रचालनीयता: मानक डेटा और एपीआई के विनिर्देश- सरकार, एग्रीटेक (कृषि प्रौद्योगिकी और तकनीकी नवाचारों का इस्तेमाल) और अनुसंधान संगठनों को निर्बाध डेटा साझा करने में सक्षम बनाएंगे।
3. राष्ट्रीय प्रभाव के लिए मापनीयता: लाखों किसानों को कृषि और संबंधित क्षेत्रों में सहायता के लिए डिज़ाइन किया गया, एग्री स्टैक मापनीय है और सटीक कृषि कार्य और बेहतर बाजार पहुंच जैसी पहल को सुविधाजनक बनाएगा।
4. इसके मूल में समावेशिता: सहमति और किसान केंद्रित उपायों से इसमें छोटे किसानों, कृषक मजदूरों और महिलाओं के लिए समान पहुंच सुनिश्चित की गई है।
सूचना प्रौद्योगिकी से आगे: एग्री स्टैक परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में
एग्री स्टैक कृषि में प्रणालीगत परिवर्तन को उत्प्रेरित करके पारंपरिक सूचना प्रौद्योगिकी परियोजना से भी आगे बढ़ गया है। ऐतिहासिक रूप से भूमि रिकॉर्ड को अद्यतन करने की प्रक्रिया चुनौतियों से भरी हुई थी और राजस्व विभाग के लिए इसकी प्रशासनिक अत्यावश्यकता भी नहीं होती थी जिससे पुराने और गलत रिकॉर्ड बन जाते थे जो आर्थिक विकास में बाधक थे।
किसान रजिस्ट्री में यह आवश्यक बनाया गया है कि किसानों के स्वामित्व वाली सभी कृषि भूमि को वर्तमान समय के अनुसार अद्यतन किया जाए और और उनके व्यक्तिगत विवरण से जोड़ा जाए क्योंकि कृषि भूमि से जुड़े लाभ, जैसे फसल बीमा, बीज, उर्वरक और सिंचाई- किसान रजिस्ट्री से जुड़े होंगे। इसलिए भूमि रिकॉर्ड को अद्यतन करने की प्रत्यक्ष और तत्काल आवश्यकता है। इससे किसानों और राजस्व विभाग दोनों को भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जा सकेगा। सटीक और अद्यतित भूमि रिकॉर्ड जानकारी से विवादों में कमी आएगी, सेवा वितरण सुव्यवस्थित होगा, आपूर्ति श्रृंखला दक्षता बढ़ेगी, बाजार तक पहुंच में सुधार होगा और सकल घरेलु उत्पाद बढ़ोत्तरी में यह योगदान देगा।
आगे की योजना
एग्री स्टैक का लक्ष्य किसान रजिस्ट्री के अगले चरण में कृषि भू-स्वामियों से आगे बढ़ते हुए पशुपालकों, मत्स्यपालकों, बटाईदार किसानों और वन भूमि क्षेत्र धारकों को इसमें शामिल करना है। डिजिटल फसल सर्वेक्षण, खरीफ सत्र 2025 से पूरे देश में शुरू किया जाएगा।
निष्कर्ष और आगे का मार्ग
किसान केंद्रित डिजिटल बुनियादी ढांचे एग्री स्टैक में कृषि में डिजिटल बदलाव से लोगों को सशक्त बनाने, संवहनीयता को बढ़ावा देने और अवसरों तक समान पहुंच बनाने के लिए उभरती हुई तकनीकों का उपयोग हुआ है। समावेशी दृष्टिकोण और मापनीयता पर जोर देने के साथ, एग्री स्टैक कृषि क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। इससे आजीविका बढ़ेगी और राष्ट्रीय विकास को गति मिलेगी।