केंद्रीय विवि में 10 दिवसीय अनुसंधान कार्यशाला: समाज विज्ञान में शोध क्षमता वृद्धि पर जोर
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा 3 जनवरी से 12 जनवरी 2025 तक 10 दिवसीय अनुसंधान कार्यशाला का आयोजन सप्त सिंधु परिसर 2 देहरा, जिला काँगड़ा, हिमाचल प्रदेश में किया जा रहा है।

इस 10 दिवसीय अनुसंधान कार्यशाला में पूरे भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों से 30 शोधार्थियों का चयन हुआ था। इस कार्यशाला का उद्देश्य समाज विज्ञान के शोधार्थियों की शोध क्षमता को बढ़ाना है। इस कार्यशाला के निदेशक प्रो. संजीत सिंह और सह-समन्वयक डॉ. शशि पूनम हैं।
इस 10 दिवसीय अनुसंधान कार्यशाला के पांचवे दिन डॉ. एच एल शर्मा को विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया गया। डॉ. एच एल शर्मा राजकीय महाविद्यालय नेरवा में प्राचार्य के रूप मे कार्यरत हैं। डॉ. एच एल शर्मा उच्चतर शिक्षा विभाग, हिमाचल प्रदेश के अर्थशास्त्र विभाग में भूतपूर्व सह-प्राध्यापक रह चुके हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. संजीत सिंह और डॉ. एच एल शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन द्वारा किया गया।
कार्यशाला के पहले सत्र में डॉ. एच एल शर्मा ने शोधार्थियों को एक्सेल सॉफ्टवेयर के बारे मे संक्षिप्त रूप से सिखाया और कई कमाण्ड को उदाहरण सहित सिखाया, जिससे शोधार्थियों को भविष्य में डाटा विश्लेषण करने मे सहयता मिलेगी। एक्सेल में इनपुट मेसेज, कंडीशनल फॉर्मेटिंग, हाइड सेल, डुप्लीकेट डाटा हटाना, ड्रॉपडाउन लिस्ट, फ़्रीज़ पेनल, वॉटरमार्क लगाना, मीन, मीडियन, मोड से डाटा एनालिसिस करना इत्यादि सिखाया गया। सत्र के अंत में शोधार्थियों की शंकाओं को संबोधित किया गया।
सत्र के अंत में प्रो. संजीत सिंह ने डॉ. एच एल शर्मा जी को टोपी-शॉल पहना कर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। श्रीमती सीमा शर्मा भी कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जिन्हें डॉ. शशि पूनम ने टोपी-शॉल पहनाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में डॉ. विक्रम शर्मा को विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया गया जो कि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में पुस्तकालय अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं।
डॉ. विक्रम शर्मा ने शोधार्थियों को अनुसंधान अखंडता, डायरी लिखना, शोध संसाधन, ई-पुस्तक, ई-पत्रिका, अनुसंधान नैतिकता, ई-पुस्तकालय, शोध गंगा, नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी, टर्नटिन इत्यादि के बारे मे बताया गया। सत्र के अंत में शोधार्थियों के प्रश्नों को सम्बोधित किया गया।
कार्यशाला के अंत मे प्रो. संजीत सिंह और शोधार्थियों ने डॉ. विक्रम शर्मा जी को टोपी-शॉल पहनाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।