अप्रैल 27, 2026

समीर, एमईआइटीई और एमसीटीई, भारतीय सेना ने तकनीकी उन्नति के लिए रणनीतिक साझेदारी की

22 जून को एक ऐतिहासिक कार्यक्रम में, भारतीय सेना के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआइटीई) के तहत एक स्वायत्त अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (समीर) ने ‘भारतीय सेना के लिए भविष्य की वायरलेस प्रौद्योगिकी’ में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन पर एमसीटीई के कमांडेंट, कर्नल कमांडेंट कोर ऑफ सिग्नल, लेफ्टिनेंट जनरल केएच गवास, और समीर के महानिदेशक, डॉ पीएच राव, ने हस्ताक्षर किए। यह कार्यक्रम मेयती के समूह समन्वयक श्री एसके मारवाह, और एवीएसएम, वीएसएम, अतिरिक्त महानिदेशक, आर्मी डिज़ाइन ब्यूरो, भारतीय सेना मेजर जनरल सीएस मान, की सम्मानित उपस्थिति में आयोजित किया गया। इससे देश की रक्षा और तकनीकी परिदृश्य में इस पहल का महत्व परिलक्षित होता है।  

यह पहल भारतीय सेना की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो कि सेना प्रमुख द्वारा 2024 को ‘भारतीय सेना के लिए तकनीकी अपनाने का वर्ष’ के रूप में घोषित दृष्टिकोण के अनुरूप है।

एमसीटीई में ‘उन्नत सैन्य अनुसंधान और इनक्यूबेशन केंद्र’ स्थापित करने की योजना को हुए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर से फिर से बल मिलने की उम्मीद है। इस केंद्र का उद्देश्य भारतीय सेना के लिए उन्नत वायरलेस प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना है।

समीर और एमसीटीई के बीच साझेदारी समझौते से बढ़कर आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों का सामना करने के लिए नई तकनीकी सीमाओं के अन्वेषण में साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वायरलेस प्रौद्योगिकियों में समीर की विशेषज्ञता और संचार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और साइबर संचालन में एमसीटीई के अनुप्रयोग कौशल को मिलाकर, यह सहयोग रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में पर्याप्त प्रगति का वादा करता है।

इस साझेदारी के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:-

  • संयुक्त अनुसंधान और विकास – सहयोगी परियोजनाएं 5G, 6G, उन्नत सेलुलर प्रौद्योगिकियों, सॉफ्टवेयर परिभाषित रेडियो और काग्निटिव रेडियो, सैटेलाइट संचार, एंटीना डिजाइन, फ्री स्पेस ऑप्टिक्स और ट्रोपो-स्कैटर संचार, साथ ही साथ एआई, क्वांटम और सैन्य-विशिष्ट चिप डिजाइन में संयुक्त विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए तैनाती योग्य समाधानों को लक्षित करेंगी।
  • इनक्यूबेशन सेंटर – यह केंद्र एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स को शामिल करते हुए संकल्पना से लेकर मास उत्पादन तक सैन्य-विशिष्ट नवीन समाधानों के विकास में सहयोग करेगा।
  • इसके अतिरिक्त, समझौता ज्ञापन का उद्देश्य ज्ञान का आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और विकास पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित करना है।

समीर और एमसीटीई के बीच सहयोग का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी अवसंरचना को बढ़ाना है, जिसके संभावित लाभ केवल सैन्य क्षेत्र तक ही सीमित नहीं होंगे, बल्कि इससे कहीं आगे तक जाएंगे। हासिल की गई प्रगति दूरसंचार, आपातकालीन प्रतिक्रिया और सार्वजनिक सुरक्षा को भी प्रभावित करेगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के समग्र दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाता है।

इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना समीर और एमसीटीई के बीच साझेदारी में एक महत्वपूर्ण क्षण है, जो नवाचार और सहयोगात्मक सफलता से भरे भविष्य का संकेत देता है। यह रणनीतिक गठबंधन सरकारी अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और सैन्य शैक्षणिक निकायों के बीच सहयोग के लिए नए मानक स्थापित करने के लिए तैयार है, जिससे महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति होगी।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में, सेना डिजाइन ब्यूरो के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल सीएस मान, एवीएसएम, वीएसएम ने विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के अवशोषण पर भारतीय सेना के दृष्टिकोण को विस्तार से बताया। उन्होंने सैन्य अनुप्रयोगों के लिए विभिन्न उभरती प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों के विकास में एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों के बारे में बताया।

श्री एस.के. मारवाह, समूह समन्वयक, एमईआइटीई ने रक्षा और रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए एमईआइटीई की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने रणनीतिक और रक्षा क्षेत्रों में समीर और सीडैक के योगदान के बारे में भी विस्तार से बताया।

समीर की ओर से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षरकर्ता डॉ. पी.एच. राव ने रक्षा क्षेत्र में समीर के महत कार्यों की झलकियां दीं साथ ही भारतीय सेना के लिए, विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में, तैनात करने योग्य समाधान विकसित करने के लिए समझौता ज्ञापन के महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण की जानकारी दी।

पीवीएसएम, वीएसएम, कमांडेंट एमसीटीई लेफ्टिनेंट जनरल केएच गवास, और कर्नल कमांडेंट कोर ऑफ सिग्नल्स ने एमओयू के महत्व और एमसीटीई की एमओयू से अपेक्षाओं को सामने रखा- पूरे देश के दृष्टिकोण के साथ पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए एक साथ आ रहे, एमसीटीई, समीर, शिक्षाविदों, उद्योग, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के सहयोगात्मक प्रयासों से हासिल किया गए सामरिक युद्ध क्षेत्र में फील्ड डिप्लॉयेबल समाधान विकसित किए जा सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी अभूतपूर्व उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करेगी और सरकारी अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और सैन्य शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग के लिए एक नया मानक स्थापित करेगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की राष्ट्रीय पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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