मार्च 9, 2026

14.24 करोड़ (73.93 प्रतिशत) से अधिक ग्रामीण परिवारों के घरों में अब नल से पानी की आपूर्ति हो रही है

भारत सरकार देश के सभी ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त मात्रा, निर्धारित गुणवत्ता और नियमित तथा दीर्घकालिक आधार पर सुरक्षित और पीने योग्य नल के पानी की आपूर्ति का प्रावधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत सरकार ने इस उद्देश्य से अगस्त 2019 में राज्यों के साथ साझेदारी में लागू होने वाले जल जीवन मिशन (जेजेएम) लॉन्‍च किया है। पेयजल राज्य का विषय है और इसलिए योजना, अनुमोदन, कार्यान्वयन, संचालन तथा जल जीवन मिशन के तहत पेयजल आपूर्ति योजनाओं सहित, रखरखाव का दायित्व राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों का है। भारत सरकार राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करके समर्थन देती है।

जल जीवन मिशन लॉन्‍च किए जाने के बाद से ग्रामीण घरों तक नल के पानी की पहुंच बढ़ाने की दिशा में देश में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अगस्त 2019 में जल जीवन मिशन की घोषणा के समय केवल 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) ग्रामीण घरों में नल के पानी के कनेक्शन होने की सूचना थी। अब तक, जैसा कि राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा 04.02.2024 को रिपोर्ट किया गया है, अतिरिक्त 11.01 करोड़ ग्रामीण परिवारों को जेजेएम के अंतर्गत नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। इस प्रकार, 04.02.2024 तक देश के 19.27 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 14.24 करोड़ (73.93 प्रतिशत) से अधिक परिवारों के घरों में नल के पानी की आपूर्ति होने की सूचना है।

जल जीवन मिशन लागू करने में राज्यों के समक्ष आने वाली कुछ प्रमुख चुनौतियाँ इस प्रकार सूचीबद्ध हैं:

  1. जल संकट वाले क्षेत्रों में भरोसेमंद पेयजल स्रोतों का अभाव,
  2. भूजल में गंदगी पैदा करने वाले तत्‍वों की मौजूदगी,
  3. असमान भौगोलिक भू-भाग, बिखरी हुई ग्रामीण बस्तियाँ,
  4. गाँव में जल आपूर्ति अवसंरचना प्रबंधन और संचालन के लिए स्थानीय ग्रामीण समुदायों की क्षमता का अभाव।

इसके अतिरिक्‍त, कुछ राज्यों में समतुल्य राज्य हिस्सेदारी जारी करने में विलंब ने भी मिशन की प्रगति को चुनौती दी है।

जेजेएम के परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार एक गांव में सभी ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन का प्रावधान करने के बाद योजना लागू करने वाला विभाग ग्राम पंचायत को पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान करता है और गांव को जेजेएम-आईएमआईएस पर ‘हर घर जल’ गांव के रूप में चिह्नित करता है। इसके बाद ग्राम पंचायतें अपनी ग्राम सभा की बैठक में काम पूरा होने की रिपोर्ट को जोर से पढ़ने के बाद औपचारिक रूप से स्‍वयं को ‘हर घर जल’ गांव के रूप में प्रमाणित करने का प्रस्ताव पारित करती हैं। कार्यान्वयन विभाग द्वारा प्रदान किए गए प्रमाण पत्र की प्रति, ग्राम सभा द्वारा पारित प्रस्ताव तथा ग्राम सभा को कैप्चर करने वाला एक छोटा वीडियो जेजेएम डैशबोर्ड पर दिखाई देता है और गांव को जेजेएम-आईएमआईएस में प्रमाणित के रूप में चिह्नित किया जाता है। इस तरह दो प्रक्रियाओं में समय अंतराल के कारण हर घर जल रिपोर्ट और प्रमाणित गांवों में अंतर मौजूद है।

जैसा कि राज्य द्वारा रिपोर्ट किया गया है, 30.01.2024 तक, ‘हर घर जल’ के रूप में रिपोर्ट किए गए लगभग 2.02 लाख गांवों में से 1.01 लाख से अधिक गांवों को संबंधित ग्राम सभा द्वारा प्रमाणित किया गया है। राज्य/केन्‍द्र शासित क्षेत्र-वार विवरण अनुलग्‍नक-I में है।

राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को सभी घरों में नल का पानी कनेक्शन प्रदान करने और एचजीजे प्रमाणीकरण पूरा करने के लिए विभिन्न समीक्षा बैठकों, क्षेत्र दौरों, सम्मेलनों आदि के दौरान नियमित रूप से सलाह दी जा रही है। इसके अतिरिक्‍त राज्यों को समय-समय पर गांव में नल जल आपूर्ति कार्य पूरा होने के बाद हर घर जल प्रमाणीकरण के लिए विशेष ग्राम सभा बैठकें आयोजित करने की सलाह दी जाती है।

जेजेएम के अंतर्गत, गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को भुगतान से पहले कार्यान्वयन की गुणवत्ता और कार्य के निरीक्षण की जांच करने के लिए तीसरे पक्ष की निरीक्षण एजेंसियों को शामिल करने की सलाह दी गई है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग मानक सांख्यिकीय नमूने के आधार पर एक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष एजेंसी के माध्यम से मिशन के अंतर्गत प्रदान किए गए घरेलू नल जल कनेक्शन की कार्यक्षमता का वार्षिक मूल्यांकन भी करता है। कार्यक्षमता मूल्यांकन 2021-22 के दौरान, यह पाया गया कि 86 प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन काम कर रहे थे। इनमें से 85 प्रतिशत को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल रहा था, 80 प्रतिशत को उनकी पाइप जलापूर्ति योजना के लिए जल आपूर्ति समय के अनुसार नियमित रूप से पानी मिल रहा था, और 87 प्रतिशत घरों को निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों के अनुसार पानी मिल रहा था।

पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी लाने के लिए एक ऑनलाइन ‘जेजेएम डैशबोर्ड’ और मोबाइल ऐप बनाया गया है, जो राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, जिला और गांव-वार प्रगति के साथ-साथ ग्रामीण घरों में नल के पानी की आपूर्ति के प्रावधान की स्थिति प्रदान करता है।

इसके अतिरिक्‍त नल के पानी के कनेक्शन के माध्यम से सार्वभौमिक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने कार्यक्रम के कार्यान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन की एक व्यापक बहु-स्तरीय और बहु-प्रारूप प्रणाली विकसित की है, लक्षित वितरण के लिए परिवार के मुखिया के आधार को जोड़ने और विशिष्ट परिणामों की निगरानी, वैधानिक प्रावधानों के अधीन, जिसमें बनाई गई संपत्ति की जियो-टैगिंग, भुगतान करने से पहले तीसरे पक्ष का निरीक्षण, सेंसर आधारित आईओटी समाधान आदि के माध्यम से गांवों में पानी की आपूर्ति की मापन और निगरानी शामिल है।

2019-20 से जल जीवन मिशन के अंतर्गत आवंटित केंद्रीय निधि का राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार विवरण अनुलग्‍नक-II में है।

जल राज्य का विषय है, मिशन के तहत परिकल्पित विभिन्न निगरानी व्‍यवस्‍थाओं के माध्यम से रिपोर्ट किए गए आंकड़ों और जमीनी हकीकत में यदि कोई विसंगतियां पाई जाती हैं, तो उन्हें अपेक्षित तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए संबंधित राज्य सरकारों के साथ उठाया जाता है।

यह जानकारी लोकसभा में जल शक्ति राज्य मंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने एक लिखित उत्तर में दी।

संलग्नक – I, II के लिए यहां क्लिक करें।

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