मार्च 9, 2026

नीति आयोग ने “भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और देख-रेख में वृद्धि” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की: राज्य सहायता मिशन (एसएसएम) के अंतर्गत एक पहल

नीति आयोग ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्‍ल्‍यू) के सहयोग से 9 जनवरी 2024 को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहंस), बेंगलुरु में “भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और देख-रेख में वृद्धि” विषय पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्‍ल्‍यू), भारत सरकार और स्‍वास्‍थ्‍य एंव परिवार कल्‍याण विभाग, कर्नाटक सरकार के सहयोग से बेंगलुरू में एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला का उद्देश्य जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (डीएमएचपी) के अंतर्गत मौजूदा अंतराल और चुनौतियों पर राज्यों और अन्य हितधारकों के विचारों को जानना और राज्यों से उनकी सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को सीखना था, जिन्हें उनकी प्रासंगिकता के साथ आगे अन्य राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों में दोहराया जा सकता है।

एक दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला की अध्यक्षता माननीय सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग, डॉ. वी.के. पॉल ने की, और इसमें उपस्थित प्रमुख लोगों में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष और अध्यक्ष, डॉ. बी.एन. गंगाधर; एमओएचएफडब्‍ल्‍यू की आर्थिक सलाहकार इंद्राणी कौशल; निमहंस की निदेशक डॉ. प्रतिमा मूर्ति; मुख्‍य सचिव (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण), कर्नाटक सरकार अनिल कुमार टी.के.; एमओएचएफडब्ल्यू, डीजीएचएस, आईसीएमआर और राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ डब्ल्यूएचओ भारत, यूनिसेफ के क्षेत्रीय और तकनीकी विशेषज्ञ और विकास भागीदार जो प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं, शामिल थे। यह कार्यशाला राज्य सहायता मिशन (एसएसएम) के तहत एक पहल, एनआईटीआई-राज्य कार्यशाला श्रृंखला के एक भाग के रूप में आयोजित की गई थी।

उद्घाटन सत्र में, नीति आयोग ने कार्यशाला के संदर्भ को निर्धारित करने के लिए एक संक्षिप्त प्रस्तुति दी, जिसके बाद एमओएचएफडब्‍ल्‍यू द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें राष्ट्रीय और जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के वर्तमान परिदृश्य और इसके कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए आगामी प्रस्तावित रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया। कर्नाटक सरकार के मुख्‍य सचिव (स्वास्थ्य) ने “जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के बेल्लारी मॉडल से आगे बढ़ना: कर्नाटक की सफलता की कहानी” पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए कर्नाटक राज्य की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला गया। तकनीकी सत्र निमहंस के निदेशक की एक विस्तृत प्रस्तुति के साथ संपन्न हुए, जिसमें टेली-मानस के हाल ही में शुरू किए गए घटक के तहत चुनौतियों, अनुभवों और आगे बढ़ने के तरीके के बारे में विस्तार से बताया गया।

शेष कार्यशाला को चार सत्रों में विभाजित किया गया था, जिसमें एक पैनल चर्चा और बातचीत के तीन गोलमेज सत्र थे, जो चुनौतियों का समाधान करने, राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों में वर्तमान पहलों और सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करने और भारत में समग्र मानसिक स्वास्थ्य देख-रेख इकोसिस्‍टम के लिए आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करने पर केंद्रित थे। सत्र में शामिल प्रतिभागियों में एमओएचएफडब्‍ल्‍यू, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ नेतृत्व, निमहंस, टिस और इबहास के क्षेत्रीय विशेषज्ञ, साथ ही डब्‍ल्‍यूएचओ भारत, यूनिसेफ और प्रमुख विकास भागीदारों के प्रतिनिधि शामिल थे।

प्रतिनिधियों ने जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को मजबूत करने, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन, प्रशिक्षण, उपचार और आईईसी के संबंध में विचार सामने रखे; आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्राथमिक मानसिक स्वास्थ्य देखभाल का विकास और विस्तार करना; और मानसिक बीमारी वाले व्यक्तियों के अधिकार, जिनमें पुनर्एकीकरण, पुनर्वास और सशक्तिकरण शामिल हैं। 31 राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के प्रतिभागियों ने जमीनी स्तर पर विचार साझा करने और तत्काल चुनौतियों का समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समापन सत्र में नीति आयोग के माननीय सदस्य (स्वास्थ्य) ने एक नया राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य देख-रेख कार्यक्रम तैयार करने और पुनर्कल्पना का अवसर दोहराया, जो मानसिक बीमारियों और विकारों के उपचार की बड़ी आवश्यकता का समाधान करेगा। आगे का रास्ता समावेशी और कुशल सेवा वितरण के लिए एक अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण और समग्र दूरदर्शिता विकसित करना, पारंपरिक चिकित्सा के पहलुओं को जोड़कर एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना, और मनोरोग चिकित्सा, मनोविकृति संबंधी सामाजिक कार्य और नैदानिक मनोविज्ञान ​​में स्नातकोत्तर सीटों को उपयुक्‍त बनाकर मानसिक स्वास्थ्य देख-रेख कार्यबल को बढ़ाना है।

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