मार्च 7, 2026

‘हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद’ (आईपीआरडी-2023) का 2023 संस्करण

भारतीय नौसेना की तीन दिवसीय वार्षिक शीर्ष स्तरीय क्षेत्रीय रणनीतिक वार्ता “इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग 2023” (आईपीआरडी-2023) का 15 नवंबर 2023 को नई दिल्ली में शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर, माननीय उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ‘स्मारक सत्र’ के मुख्य अतिथि थे और माननीय वित्त और कॉर्पोरेट मामले मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना विशेष संबोधन दिया।

उपराष्ट्रपति का मुख्य संबोधन

इस अवसर पर अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि समुद्र अपनी विशाल आर्थिक क्षमता के कारण वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए नई सीमा के रूप में उभर रहा है। उन्होंने समुद्र और उसकी संपत्तियों पर दावों को चुनौती देने की संभावना को रोकने के लिए एक नियामक व्यवस्था और उसके प्रभावी प्रवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि कमजोर स्थिति से शांति की आकांक्षा करना संभव नहीं है इसलिए सभी बुनियादी सिद्धांतों में मजबूत बनने की आवश्यकता है। भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (विश्व एक परिवार है) के दार्शनिक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शांतिपूर्ण और समृद्ध क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए सहयोगात्मक सुरक्षा और नवीन साझेदारी ही आगे बढ़ने का मार्ग है।

वित्तमंत्री का विशेष संबोधन

अपने संबोधन में, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आईपीआरडी ने स्वयं को रायसीना संवाद के समुद्री संस्करण के रूप में स्थापित करके अत्यंत लोकप्रियता हासिल की है। उन्होंने भारत के आर्थिक विकास में समुद्री संपर्क के महत्व पर बल देते हुए भारत-मध्य-पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के प्रमुख पहलुओं का भी उल्लेख किया जिसकी घोषणा इस वर्ष नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन में की गई थी।

सीडीएस द्वारा आमंत्रण संबोधन

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने “इंडो-पैसिफिक में समुद्री संपर्क पहल” विषय पर आयोजित पेशेवर सत्र के दौरान अपने आमंत्रण संबोधन में इस क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण और परिप्रेक्ष्य पर आधारित इंडो-पैसिफिक के ऐतिहासिक और समकालीन महत्व का उल्लेख किया। विश्व स्तर पर भारत को जोड़ने में महासागरों के महत्व और सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) एवं स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर के माध्यम से सुरक्षा के समग्र दृष्टिकोण पर भी विचार-विमर्श किया गया।

नौसेना प्रमुख द्वारा विशेष संबोधन

नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने अपने विशेष संबोधन में समुद्री शक्ति के रूप में भारत की बढ़ती शक्ति का उल्लेख किया। नौसेना प्रमुख ने मार्च 21 में एमवी एवरगिवेन द्वारा स्वेज नहर में अवरोध के उदाहरण के माध्यम से समुद्री गलियारों की प्रासंगिकता और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक परिवेश पर इसके महत्वपूर्ण प्रभावों पर चर्चा की जिसके कारण वैश्विक स्तर पर 54 बिलियन डॉलर के व्यापार का अनुमानित नुकसान हुआ। साथ ही, उन्होंने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को प्रभावित करने वाले गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने की आवश्यकता पर भी बल दिया। हाल ही में संपन्न गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव का उदाहरण देते हुए नौसेना प्रमुख ने इंडो-पैसिफिक में भारतीय नौसेना की सहयोगी और सहकारी पहलों के संदर्भ में भी जानकारी दी।

पुस्तकों का विमोचन

उपराष्ट्रपति ने “बिल्डिंग पार्टनरशिप्स- इंडिया एंड इंटरनेशनल कॉरपोरेशन फॉर मैरीटाईम सिक्योरिटी (साझेदारियों का निर्माण-भारत और समुद्री सुरक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग)” नामक पुस्तक का विमोचन किया और माननीय वित्त मंत्री ने मैरीटाईम पर्सपैक्टिव्स-मैरीटाईम सिक्योरिटी डाइनैमिक्स इन दी इंडो-पैसेफिक (समुद्री परिप्रेक्ष्य: भारत-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा गतिशीलता: रणनीतियाँ और रुझान)” शीर्षक से एक संपादित खंड जारी किया। दोनों पुस्तकों का प्रकाशन नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन द्वारा किया गया है।

व्यावसायिक सत्र

इस अवसर पर दिनभर में “समुद्री संपर्क के नोड्स” और “भारत-प्रशांत में समुद्री कनेक्टिविटी पहल” विषयों पर केंद्रित दो पेशेवर सत्रों का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र के दौरान पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव टी.के.रामचंद्रन द्वारा जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और भारत के वैश्विक स्तर के जाने-माने प्रतिभागियों के साथ बंदरगाह नेतृत्व आधारित विकास पर केंद्रित विचार-विमर्श किया गया। दूसरे सत्र में सीडीएस ने अपना आमंत्रण संबोधन दिया। इसके पश्चात जापान, केन्या, नेपाल, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के साथ एक पैनल चर्चा भी हुई।

दिनभर हुई गतिविधियों का समापन सहयोग के दो समझौता ज्ञापनों के साथ हुआ। इन  समझौता ज्ञापनों पर नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (एनएमएफ) और नेपाल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड एंगेजमेंट (एनआईआईसीई), नेपाल और एनएमएफ एवं द ग्लोबल सेंटर फॉर पॉलिसी एंड स्ट्रैटेजी (जीएलओसीईपीएस) केन्या के बीच हस्ताक्षर किए गए।

भारतीय नौसेना द्वारा आईपीआरडी-2023 का आयोजन अपने प्रबुद्ध भागीदार के रूप में नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के सहयोग से किया जा रहा है। 2005 में स्थापित, एनएमएफ भारत के अग्रणी समुद्री थिंक-टैंक में से एक है और यह भारत के समुद्री हितों से संबंधित मुद्दों पर अपना शोध केंद्रित करता है। फाउंडेशन ने सभी समुद्री मामलों पर स्वतंत्र, मूल और नीति-प्रासंगिक अनुसंधान के संचालन के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय ख्याति भी हासिल की है। संवाद के प्रथम दिन में मित्रवत विदेशी देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 1000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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