मार्च 9, 2026

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक एक विश्व स्तरीय कानून है: राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर

डीपीडीपी के सहयोगी कानून को डिजिटल इंडिया अधिनियम के रूप में जाना जाता है, जो 22 साल पुराने आईटी अधिनियम की जगह लेने वाला है : राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर
डीपीडीपी युवा भारतीयों के अधिकारों की रक्षा करते हुए उनके लिए अधिक से अधिक अवसर पैदा करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप है: राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर
राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने बेंगलुरु में डीपीडीपी पर युवा भारतीयों और स्टार्टअप के साथ बातचीत की

केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शनिवार को बेंगलुरु में छात्रों, स्टार्टअप और राज्य के विशेष नागरिकों के साथ बातचीत में भाग लिया। सत्र के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक बनने के पीछे की यात्रा को याद किया, जो इसकी शुरुआत से लेकर कानून के रूप में इसकी वर्तमान स्थिति तक की रूपरेखा तैयार करता है। उन्होंने 2010 में शुरू हुई अपनी यात्रा के अनुभवों को साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने संसद में बहस के विषय के रूप में गोपनीयता की अवधारणा को पेश किया था।

उन्होंने कहा, ‘डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक एक विश्वस्तरीय कानून है। 15 अगस्त, 2021 को हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘टेकेड’ शब्द सामने रखा था, जो छात्रों, युवा भारतीयों के लिए तकनीकी अवसरों से भरे भविष्य के उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो भविष्‍य के कार्यबल का हिस्सा होंगे। 2010 में जब मैं एक सांसद था, तो मैंने सदन में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया, जिसमें निजता को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने की मांग की गई थी। दुर्भाग्य से उस समय सरकार को यह बहस आवश्यक नहीं लगी, लेकिन यह एक आवश्यक बहस थी और नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग किया जा सकता था।

राजीव चंद्रशेखर ने विस्तार से बताया कि कैसे यह कानून प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप एक व्यापक मिशन के रूप में एकीकृत होता है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य दायित्वों के साथ-साथ भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप समकालीन और प्रासंगिक कानूनों को स्थापित करना है।

उन्होंने कहा, ‘आगामी कानून को डिजिटल इंडिया अधिनियम के रूप में जाना जाएगा, जो 22 साल पुराने आईटी अधिनियम की जगह लेगा। डिजिटल इंडिया अधिनियम प्रौद्योगिकी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र से सामंजस्य बिठाएगा। पहले देश में डेटा प्राइवेसी की बातचीत जीडीपीआर से शुरू और खत्म होती थी। किसी भी विदेशी चीज को सर्वश्रेष्ठ मानने का लगभग एक चलन सा था। लेकिन हमने जीडीपीआर से प्रेरणा लेने के बजाय एक भारतीय विधेयक तैयार करने का फैसला किया। हमने इंटरनेट का उपयोग करने वाले 830 मिलियन भारतीय उपयोगकर्ताओं को देखा है, जो इंटरनेट का उपयोग करते हैं और 2025-26 तक यह आंकड़ा 1.2 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। हम दुनिया में सबसे बड़े कनेक्टेड देश हैं। हम यूरोपीय संघ या अमेरिका का अनुसरण करने के बजाय भविष्य के लिए प्रौद्योगिकी में अपने स्वयं के मानकों को स्थापित करने के लायक हैं।

नागरिकों के व्यक्तिगत डिजिटल डेटा को अत्यधिक महत्व देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए, राजीव चंद्रशेखर ने पर्याप्त जुर्माना लगाने के महत्व पर जोर दिया। यह दंड एक महत्वपूर्ण उद्देश्य प्रदान करते हुए यह सुनिश्चित करता है कि उद्योग और प्लेटफॉर्म इस कानून का पालन करते रहें।

राजीव चन्द्रशेखर ने कहा कि यह कानून एक नई व्यवस्था का निर्माण कर रहा है। हम कंपनियों और उद्योगों को व्यवस्था परिवर्तन की अवधि का समय देंगे। दुरुपयोग का युग, शोषण का युग, यह मानने का युग कि भारतीय नागरिकों के पास अधिकार नहीं हैं, इस कानून के साथ समाप्त होने जा रहा है। यह बिल नवाचार इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करने का काम करेगा और व्यवस्था में किसी भी भ्रम की स्थिति को दूर करेगा। यह निजता को एक मौलिक अधिकार के रूप में घोषित किए जाने पर किसी इकाई को क्या करना चाहिए इसे स्पष्ट करता है। किसी नागरिक के डेटा उल्लंघन के मामले में, उन्हें बस वेबसाइट पर जाना होगा, डेटा सुरक्षा बोर्ड को विवरण प्रदान करना होगा और बोर्ड उल्लंघन करने वाले प्लेटफार्मों पर जुर्माना लगाते हुए जांच शुरू करेगा। हम चाहते हैं कि जुर्माना दंडात्मक हो ताकि यह प्लेटफार्मों को जिम्मेदार होने के लिए प्रोत्साहित करे।

“संसदध्वनि” नामक यह कार्यक्रम बेंगलुरु दक्षिण से सांसद और भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या के नेतृत्व में एक नागरिक जुड़ाव की पहल है।

शनिवार को राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने अपोलो अस्पताल में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् शालुमराधा थिमक्का से भी मुलाकात की। वह पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हैं और उन्हें कर्नाटक में 8,000 से अधिक पेड़ लगाने के अपने उल्लेखनीय कार्य के लिए जाना जाता है।


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