जून 19, 2026

रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भरता

केंद्र सरकार ने स्वदेशी उन्नत प्रौद्योगिकियों और जटिल प्रणालियों को विकसित करके देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं। प्रौद्योगिकी विशिष्ट रक्षा उपकरणों और हथियारों के विनिर्माण के स्वदेशीकरण और घरेलू रक्षा उत्पादन इको-सिस्टम बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम निम्नलिखित हैं: –

  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी 2020) का स्वदेशी स्रोतों के माध्यम से रक्षा उपकरणों के अधिग्रहण को अधिकतम बनाने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए घोषणा की गई है। भारत सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि पूंजी अधिग्रहण के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प ‘स्वदेश में डिजाइन, विकसित और निर्मित (आईडीडीएम)’ श्रेणी के उपकरण खरीदे जाएं और उसके बाद ‘खरीदो (भारतीय)’ श्रेणी का अनुसरण किया जाय। ‘मेक’ श्रेणियों का लक्ष्य निजी क्षेत्र सहित भारतीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की अधिकाधिक भागीदारी को शामिल करके आत्मनिर्भरता के उद्देश्य को प्राप्त करना है।
  • मेक-I, टीडीएफ और आईडीईएक्स परियोजनाओं के लिए सरकारी निधियन के प्रावधान शुरू किए गए है। डीआरडीओ क्रियान्वित प्रौद्योगिकी विकास निधि (टीडीएफ) योजना एमएसएमई और स्टार्ट-अप के घटकों, उत्पादों, प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास का समर्थन करता है। टीडीएफ योजना के अंतर्गत निधियन को प्रति परियोजना 10 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए और इसे आईडीईएक्स प्राइम योजना के तहत 1.5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए कर दिया गया था। इससे ”रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता” के दृष्टिकोण को और बल मिलेगा।  
  • रक्षा उपकरणों और प्लेटफार्मों की चार सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जिनके आयात पर प्रतिबंध रहेगा।
  • डीआरडीओ का विकास सह उत्पादन भागीदार (डीसीपीपी) मॉडल लागू किया गया है, जिसमें प्रणाली विकास परियोजनाओं में उद्योग को डीसीपीपी के रूप में स्वीकार किया गया है। विकास और उत्पादन इकाइयों का जीवन चक्र समर्थन सहित उद्योगों द्वारा निर्माण किया जाता है।
  • डीआरडीओ परीक्षण सुविधाएं उद्योगों के उपयोग के लिए खोल दी गई हैं। परीक्षण सुविधाओं को डीआरडीओ की वेबसाइट पर सूचीबद्ध किया गया है और उद्योगों को इसके बारे में सूचित कर दिया गया है। इन सुविधाओं का उद्योगों द्वारा उपयोग किया जा रहा है।
  • रक्षा और एयरोस्पेस से संबंधित वस्तुओं के स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित किए गए हैं।
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास को उद्योग, स्टार्ट-अप और शिक्षा क्षेत्र के लिए खोल दिया गया है और रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत इस उद्देश्य के लिए निर्धारित किया गया है। इसका कार्यान्वयन विभिन्न वर्तमान योजनाओं के माध्यम से किया जा रहा है और नई योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।
  • स्वदेशी डिजाइन और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए, स्वदेशी स्रोतों से खरीद के लिए निधि का भी निर्धारण किया गया है। वित्त वर्ष 2023-24 के लिएरक्षा मंत्रालय के पूंजीगत अधिग्रहण बजट में घरेलू और विदेशी खरीद के बीच 67.75:32.25 के अनुपात में धनराशि निर्धारित की गई है। इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय ने स्टार्ट-अप्स से खरीद के लिए 1500 करोड़ रुपये की राशि व्यय करने का भी निर्देश दिया है।
  • डीसीपीपी/पीए/एलएसआई से शून्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) शुल्क लिया जा रहा है।
  • उद्योगों को डीआरडीओ पेटेंट के लिए निःशुल्क सुविधा प्रदान की गई है।
  • उन प्रणालियों की सूची जो केवल उद्योग द्वारा विकसित की जाएंगी, डीआरडीओ द्वारा उनकी पहचान कर ली गई है। रक्षा मंत्रालय द्वारा इसकी घोषणा की गई है। डीआरडीओ ऐसी प्रणालियां विकसित नहीं करेगा।
  • डीआरडीओ रक्षा उद्योगों के लिए युवाओं को तैयार करने के लिए (इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, बी.टेक, एम.टेक पाठ्यक्रमों में ऐच्छिक) कौशल प्रदान कर रहा है।

पिछले तीन वर्षों के दौरान अर्थात 2021 में 11, 2022 में 25 और 2023 में 7, सेनाओं में शामिल करने के लिए डीआरडीओ द्वारा विकसित/विकसित की जा रही 43 प्रणालियों के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) प्रदान की गई है।

पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2020-21 से 2022-23 तक) के दौरान, रक्षा उपकरणों की पूंजीगत खरीद के लिए 122 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनमें से रक्षा उपकरणों की पूंजीगत खरीद के लिए भारतीय विक्रेताओं के साथ 100 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं जो कुल अनुबंध मूल्य का 87 प्रतिशत है।”

वर्ष 2013-14 की तुलना में, वर्ष 2021-22 के लिए रक्षा क्षेत्र में आयात-निर्यात का अनुपात नीचे दिया गया है:-

(करोड़ रुपये में)

वर्ष2013-142021-22
आयात मूल्य (पूंजी + राजस्व)41,198.6150,061.67
निर्यात मूल्य115312815
अनुपात (निर्यात की तुलना में आयात)35.733.90

यह जानकारी लोकसभा में रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने चंद्रप्रकाश जोशी और रेखा वर्मा को एक लिखित उत्तर में दी। 

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