अप्रैल 22, 2026

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर डिजिटल हेल्थ समिट 2023 का आयोजन किया

कार्यक्रम की विषय वस्तु ‘मिलकर एक स्वास्थ्य (वन हेल्थ) का निर्माण- स्वास्थ्य समानता में सुधार’ थी
एक सामान्य डिजिटल ढांचे के माध्यम से भारत का उद्देश्य डिजिटल पब्लिक गुड्स तैयार करना और प्रदर्शित करना है: डॉ. भारती प्रवीण पवार
 “डिजिटल पब्लिक गुड्स से पहुंच बढ़ेगी, दुनिया भर में अंतर संचालन, डेटा गोपनीयता और सुरक्षा के मानकों को बढ़ावा मिलेगा”
भारत सरकार की तरफ से शुरू की गई विभिन्न डिजिटल पहलों से देश भर में सामर्थ्य, पहुंच और समानता बढ़ेगी: डॉ. भारती प्रवीण पवार

माननीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने कहा, “एक सामान्य डिजिटल ढांचे के माध्यम से भारत का लक्ष्य डिजिटल पब्लिक गुड्स बनाना और प्रदर्शित करना, दुनिया भर के देशों की इन साधनों तक पहुंच बढ़ाना और अंतर संचालन, डेटा प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के मानकों को बढ़ावा देना है।” केंद्रीय मंत्री ने डिजिटल हेल्थ समिट 2023 के दौरान ये बातें कहीं। इस कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत भी उपस्थित रहे। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने गोवा में इसका आयोजन किया और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर इसकी ब्रांडिंग की।

डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र के सामने मौजूद प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए नीति निर्माताओं, दिग्गज उद्योगपतियों और वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विचारकों को एक साथ लाने के उद्देश्य के साथ इस कार्यक्रम की विषय वस्तु ‘मिलकर एक स्वास्थ्य (वन हेल्थ) का निर्माण- स्वास्थ्य समानता में सुधार’ थी।

इस अवसर पर संबोधन करते हुए, डॉ. पवार ने प्रतिभागियों का आभार प्रकट किया और कहा कि यह कार्यक्रम भारत के एक समान स्वास्थ्य कवरेज और ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ की दिशा में स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति में सुधार में सहायक डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार और समाधानों पर जी20 स्वास्थ्य कार्यकारी समूह के एजेंडे के अनुरूप है। डिजिटल स्वास्थ्य नवाचारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि डिजिटल नवाचार 3डी प्रिंटिंग, प्वाइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक्स, रोबोट, बायोइन्फोर्मैटिक्स, जीनोमिक्स सहित घातीय चिकित्सा में बड़े बदलावों को शक्ति प्रदान कर रहे हैं और ये एक सक्षम और समान साधन के रूप में उभर रहे हैं। इनकी स्वीकार्यता के अलावा, उन्होंने जोर देकर कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले उपचारों तक समान पहुंच के साथ ‘नागरिक केंद्रित’ डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियां मुख्य लक्ष्य बनी रहनी चाहिए।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम), ई-संजीवनी टेलीकंसल्टेशन सर्विस, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के साथ-साथ कोविन जैसी भारत सरकार की तरफ से हुई विभिन्न पहलों और देश में एक डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था के निर्माण को मजबूती देने में उनकी भूमिका के बारे में बात करते हुए, डॉ. पवार ने कहा कि ये पहल देश भर में स्वास्थ्य सेवा की पहुंच और समानता में सुधार के लक्ष्य को प्राप्त करने में हमारी मदद करेंगी।

डॉ. पवार ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है कि नई तकनीक के उपयोग को शामिल करने के उद्देश्य से जनता के लिए स्वास्थ्य सेवा वितरण को फिर से व्यवस्थित किया जाए। उन्होंने कहा कि “एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), ब्लॉकचेन, चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण में 3-डी प्रिंटिंग आदि जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां अधिक समग्र स्वास्थ्य इको सिस्टम बनाने में मदद कर सकती हैं जिनसे स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होता है।”

उन्होंने कहा, “एक वैश्विक दृष्टिकोण अक्सर अधिक प्रभावी होता है और भारत ने अपनी जी-20 की अध्यक्षता के तहत पहले से ही वैश्विक डिजिटल ढांचे पर वैश्विक सहमति की मांग करते हुए अपने तीन स्वास्थ्य उद्देश्यों में से एक के रूप में डिजिटल स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी है।”

गोवा के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा कि स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी चौथी औद्योगिक क्रांति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है और इसीलिए, इस दिशा में कदम उठाना अहम है। उन्होंने कहा कि “गोवा भारत में सर्वश्रेष्ठ सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में से एक का निर्माण कर रहा है और दीन दयाल स्वास्थ्य सेवा योजना (डीडीएसएसवाई) के रूप में लोगों के लिए एक समान स्वास्थ्य बीमा शुरू करने वाला पहला राज्य था।” राज्य में डिजिटल सेवाओं के त्वरित कार्यान्वयन का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि “गोवा देश में डिजिटल सेवाओं का दूसरा सबसे तेजी से अपनाने वाला राज्य है और साथ ही स्वास्थ्य तकनीक की मदद से रोगी केंद्रित देखभाल प्रदान करने वाले स्टार्टअप सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए भारी समर्थन दे रहा है।” उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में नीतिगत विचार-विमर्श और आवश्यक विनियमन के साथ, स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी में अधिक निवेश आकर्षित होने से अधिक सार्वजनिक-निजी भागीदारी का मार्ग प्रशस्त होगा।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. विनोद पॉल ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि भारत पहले से ही एक ढांचा, कपड़ा, मंच और एक राजमार्ग बनाकर सक्रिय रूप से कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य प्रणालियों में पहनने योग्य डिवाइस, एआई उपकरणों सहित डिजिटल स्वास्थ्य उपकरणों के सत्यापन और इस प्रकार, उपयुक्त मानकों जहां प्रौद्योगिकियों का परीक्षण किया जा सकता है, के निर्माण के लिए हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने निजी क्षेत्र से सही सोच, योजनाओं, दृष्टि और वास्तव में विभिन्न उत्पादों और संभावनाओं के लिए इसका उपयोग करने के समाधान के साथ आगे आने का अनुरोध किया। अंत में, उन्होंने हर दिन तैयार किए जा रहे डिजिटल डेटा से मूल्यवान ज्ञान को सामने लाने और बनाने की क्षमता विकसित करने के महत्व पर जोर दिया।

सत्र के दौरान ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ के विजन को साकार करने की दिशा में ‘स्वास्थ्य डेटा का लाभ उठाने और संकलन’ जैसे प्रमुख क्षेत्रों, डिजिटल स्वास्थ्य में नवाचार के साथ-साथ डिजिटल स्वास्थ्य के भविष्य में अहम निवेश पर कई अन्य समृद्ध चर्चाएं देखी गईं।

इस अवसर पर एमओएचएफडब्ल्यू में सचिव राजेश भूषण, एमओएचएफडब्ल्यू में अपर सचिव लव अग्रवाल, सीआईआई हेल्थकेयर काउंसिल के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहान, सीआईआई की डिजिटल हेल्थ पर उप समिति के चेयमैन शशांक एनडी, आर्थिक सहयोग एवं विकास विभाग (ओईसीडी) के रोजगार, श्रम और सामाजिक मामलों के उप निदेशक मार्क पियर्सन, यूनिसेफ इंडिया के प्रमुख (स्वास्थ्य) लूगी डी एकिनो के साथ-साथ मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग हितधारक, वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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