मार्च 9, 2026

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप एस. पुरी ने नई दिल्ली में 7वें पेट्रोकेमिकल कॉन्क्लेव में पूर्ण सत्र को संबोधित किया

कॉन्क्लेव का उद्देश्य भारतीय पेट्रोकेमिकल उद्योग की स्थिरता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप एस. पुरी ने नई दिल्ली में 7वें पेट्रोकेमिकल कॉन्क्लेव में पूर्ण सत्र को संबोधित किया। इस दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, श्रम और रोजगार राज्य मंत्री रामेश्वर तेली, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय सचिव पंकज जैन, इंडियन ऑयल अध्यक्ष एस एम वैद्य, इंडियन ऑयल निदेशक (योजना और व्यवसाय विकास) और इंडियन ऑयल के अन्य कार्यकारी निदेशक उपस्थित थे। कॉन्क्लेव का उद्देश्य विभिन्न पेट्रोकेमिकल हितधारकों को क्षेत्र के साथ अवसरों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक व्यापक मंच प्रदान करना और एनर्जी ट्रांजिशन, कच्चे तेल से रसायन, उद्योग 4.0, उभरते हुए ग्रीन विकल्पों और सर्कुलर इकोनॉमी जैसी ताकतों के प्रभावों पर विचार-मंथन करना है।

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केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप एस. पुरी नई दिल्ली में 7वें पेट्रोकेमिकल कॉन्क्लेव में पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए

सत्र में बोलते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “फिलहाल भारत में पेट्रोकेमिकल बाजार का आकार लगभग 190 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पेट्रोकेमिकल सेगमेंट की प्रति व्यक्ति खपत काफी कम है और यह अंतर मांग में वृद्धि और निवेश के अवसरों के लिए पर्याप्त स्थान प्रदान करता है। “पेट्रोकेमिकल्स सेक्टर मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड की पीएम की पहल के अनुरूप भी है और भारत को एक ग्लोबल मैन्यूफेक्चरिंग हब के रूप में बदल सकता है। पेट्रोकेमिकल उद्योग के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारकों में बढ़ती आबादी और तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के लिए पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बढ़ती मांग है। भारत वैश्विक पेट्रोकेमिकल डिमांड के वृद्धिशील विकास में 10 प्रतिशत का योगदान देगा। सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने और स्वचालित मार्ग के माध्यम से 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सहित व्यवसाय करने में आसानी में सुधार के लिए कई नीतियां बनाई हैं।”

राज्य मंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, रामेश्वर तेली ने कहा, “पेट्रोकेमिकल्स जैसे क्षेत्रों ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की सफलता की कहानी में बहुत योगदान दिया है और भविष्य में भी इसमें वृद्धि जारी रहेगी। पेट्रोकेमिकल उद्योग ने इस यात्रा में अहम भूमिका निभाई है और आगे भी इससे उम्मीद है।

एक विशेष पूर्ण सत्र में गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए इंडियन ऑयल के अध्यक्ष एस एम वैद्य ने कहा, “वर्तमान में, पेट्रोकेमिकल उत्पादन तेल और गैस की वैश्विक मांग का क्रमशः लगभग 14 प्रतिशत और 8 प्रतिशत है। नई प्रौद्योगिकियों के विकास के साथ, विशेष रूप से क्रूड टू केमिकल्स में, पेट्रोकेमिकल उत्पादन हिस्सेदारी शीघ्र ही लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है।

कॉन्क्लेव में हरदीप सिंह पुरी द्वारा “भारत का पेट्रोकेमिकल भविष्य- सतत् और आत्मनिर्भर” पर एक श्वेत पत्र भी जारी किया गया। इससे पहले दिन में, इस कॉन्क्लेव का उद्घाटन सुजॉय चौधरी, निदेशक (योजना और व्यवसाय विकास), इंडियन ऑयल और इंडियन ऑयल के अन्य कार्यकारी निदेशकों की उपस्थिति में अरुण बरोका, सचिव, रसायन और पेट्रोकेमिकल्स विभाग द्वारा किया गया था।

विचार-विमर्श में भाग लेने वाले कुछ प्रमुख वक्ताओं में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, विश्व बैंक, तोहो टाइटेनियम, रॉयल कमीशन फॉर जुबैल और यान्बू के विचारक, केमिकल मार्केट एनालिटिक्स, केर्नी, एस एंड पी ग्लोबल, ईआईएल, केपीएमजी, वुड मैकेंज़ी, बीएएसएफ, तोहो टाइटेनियम के इंडस्ट्री लीडर्स और पेट्रोकेमिकल उद्योग के विभिन्न वर्टिकल जैसे लुम्मस टेक्नोलॉजीज, यूओपी हनीवेल, लिंडे, ओर्लिकॉन बरमाग, जॉनसन मैथे, केबीआर, थिसेनक्रुप इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस, मिलिकेन केमिकल एंड टेक्सटाइल और कई अन्य प्रमुख प्रौद्योगिकी प्रदाता जैसे प्रमुख सलाहकार शामिल हैं।

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