मार्च 10, 2026

इस्पात मंत्रालय ने राज्य सरकारों के उद्योग/खान/इस्पात मंत्रियों के सम्मेलन की मेजबानी की

“संपूर्ण सरकार” वाले दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ते हुए, भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय ने नई दिल्ली में राज्य सरकारों के उद्योग/खान/इस्पात मंत्रियों के सम्मेलन की मेजबानी की, जिसका उद्देश्य राज्य और केंद्र सरकारों को इस क्षेत्र में कच्चे माल का खनन, विकास और भविष्य की चुनौतियों से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान करना है।

अपने उद्घाटन भाषण में, केंद्रीय इस्पात और नागरिक उड्डयन मंत्री, ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया ने भारत के इस्पात क्षेत्र में प्राप्त की गई उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और कहा कि पिछले 8 वर्षों में इस क्षेत्र में बहुत ठोस प्रगति और वृद्धि हुई है। मंत्री ने राज्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में इस्पात की खपत को बढ़ाने, इस्पात बनाने में सभी श्रेणी के लौह अयस्कों का उपयोग करने, खानों की समय पर नीलामी करने, रीसाइक्लिंग उद्योग को औपचारिक रूप प्रदान करने और जर्जर हो चुके वाहनों को स्क्रैप करने के लिए सभी ठोस प्रयास करने का आग्रह किया।

इन मापदंडों से ये क्षेत्र भविष्य के लिए अनुकूल बनेंगे और इस्पात क्षेत्र को चिरस्थायी बनाएंगे। प्रधानमंत्री ने हरित इस्पात के उत्पादन पर बल दिया है जो विशेष रूप से महत्वपूर्ण है और अब इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सही कदम उठाने की आवश्यकता है। मंत्री ने कहा कि सरकार शून्य अपशिष्ट-शून्य क्षति वाली नीति में विश्वास करती है और धीरे-धीरे इस्पात क्षेत्र का अकार्बनीकरण करना आवश्यक है।

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संजय सिंह, सचिव, इस्पात मंत्रालय ने इस्पात क्षेत्र के विकास के प्रमुख रुझानों, आगे बढ़ने के उपायों और राज्यों से अपेक्षित आवश्यक सहायता के बारे में जानकारी प्रदान की। इस्पात क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को याद करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि इस्पात क्षेत्र को पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों का विकास और नियोजन, सरकार और उद्योग के बीच प्रभावी भागीदारी पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

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राज्यों के मंत्री, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, औद्योगिक विकास और निर्यात संवर्धन मंत्री, उत्तर प्रदेश, प्रफुल्ल कुमार मलिक, उद्योग और ऊर्जा मंत्री, ओडिशा सरकार, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, उद्योग नीति और निवेश संवर्धन मंत्री, मध्य प्रदेश सरकार ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया। सम्मेलन का आयोजन करने के लिए मंत्री को धन्यवाद देते हुए, उन्होंने केंद्र सरकार के साथ सहयोग करने का आश्वासन दिया। इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के अध्यक्षों/मुख्य प्रबंध निदेशकों तथा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, गुजरात, पश्चिम बंगाल, गोवा राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिया। केंद्रीय खान, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन, कोयला, नीति आयोग मंत्रालयों भी सम्मेलन में शामिल हुए और भारत में इस्पात क्षेत्र के वृद्धि और विकास पर अपने विचारों को साझा किया।

मंत्री ने सम्मेलन में शामिल सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया और सभी हितधारकों के लिए एक साझा मंच होने की आवश्यकता पर बल दिया जिससे इस्पात क्षेत्र की चुनौतियों से निपटा जा सके।

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