मार्च 8, 2026

एयरबस डिफेंस और टाटा समूह द्वारा भारत में भारतीय वायु सेना के लिए परिवहन विमान बनाया जाएगा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 30 अक्टूबर, 2022 को गुजरात के वडोदरा में इस परियोजना की आधारशिला रखेंगे

‘मेक इन इंडिया’ और घरेलू विमानन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 30 अक्टूबर, 2022 को वडोदरा, गुजरात में भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लिए एक परिवहन विमान निर्माण परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इस समारोह में शामिल होने वालों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल हैं।

यह स्मरण रखा जा सकता है कि सुरक्षा पर बनी कैबिनेट समिति ने 08 सितंबर, 2021 को मेसर्स एयरबस डिफेंस एंड स्पेस एस.ए., स्पेन से 56 सी-295एमडब्लू परिवहन विमान की खरीद को मंजूरी दी थी। 24 सितंबर, 2021 को रक्षा मंत्रालय ने संबंधित उपकरणों के साथ विमान के अधिग्रहण के लिए मेसर्स एयरबस डिफेंस एंड स्पेस एस.ए. के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।

27 अक्टूबर, 2022 को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार ने कहा कि अनुबंध के अंतर्गत 16 विमानों की आपूर्ति फ्लाईवे स्थिति में की जाएगी और 40 का निर्माण भारत में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के नेतृत्व में टीएएसएल और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के भारतीय विमान कॉन्ट्रेक्टर टाटा कंसोर्टियम द्वारा किया जाएगा। यह अपनी तरह की पहली परियोजना है जिसमें एक निजी कंपनी द्वारा भारत में एक सैन्य विमान का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 21,935 करोड़ रुपये है। इस विमान का इस्तेमाल नागरिक उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है।

आपूर्ति कार्यक्रम

पहले 16 फ्लाई-अवे विमान सितंबर 2023 और अगस्त 2025 के बीच प्राप्त होने वाले हैं। पहला मेड इन इंडिया विमान सितंबर 2026 से आने की उम्मीद है।

विमान क्षमता

C-295 एमडब्लू समकालीन तकनीक के साथ 5 से 10 टन क्षमता का एक परिवहन विमान है जो भारतीय वायुसेना के पुराने एवरो विमान की जगह लेगा। इसमें त्वरित प्रतिक्रिया और सैनिकों और कार्गो के पैरा ड्रॉपिंग के लिए एक रियर रैंप दरवाजा है। अर्ध-तैयार सतहों से शॉर्ट टेक-ऑफ/लैंडिंग इसकी एक और विशेषता है। विमान भारतीय वायुसेना की रसद क्षमताओं को मजबूत करेगा।

आत्मनिर्भरता

यह परियोजना भारतीय निजी क्षेत्र को प्रौद्योगिकी गहन और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी विमानन उद्योग में प्रवेश करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। इससे घरेलू विमानन निर्माण में वृद्धि होगी जिसके परिणामस्वरूप आयात पर निर्भरता कम होगी और निर्यात में अपेक्षित वृद्धि होगी।

साथ ही स्पेन में अपनी विनिर्माण सुविधा में एयरबस द्वारा नियोजित प्रति विमान कुल मानव घंटे के काम का 96 प्रतिशत भारत में टाटा कंसोर्टियम द्वारा किया जाएगा। टूल्स, जिग्स और टेस्टर के साथ 13,400 से अधिक डिटेल पार्ट्स, 4,600 सब-असेंबली और सभी सात मेजर कंपोनेंट असेंबलियों का निर्माण भारत में किया जाएगा। विभिन्न प्रणालियाँ जैसे इंजन, लैंडिंग गियर, एवियोनिक्स, ईडब्ल्यू सूट आदि एयरबस डिफेंस एंड स्पेस द्वारा प्रदान की जाएंगी और टाटा कंसोर्टियम द्वारा विमान पर लगाई जाएंगी। टाटा कंसोर्टियम द्वारा विमान का एक एकीकृत प्रणाली के रूप में परीक्षण किया जाएगा। विमान का उड़ान परीक्षण किया जाएगा और टाटा कंसोर्टियम केंद्र स्थित एक आपूर्ति केंद्र के माध्यम से वितरित किया जाएगा।

सभी 56 विमान भारतीय डीपीएसयू – भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट से लैस होंगे। भारतीय वायुसेना को 56 विमानों की डिलीवरी पूरी होने के बाद मेसर्स एयरबस डिफेंस एंड स्पेस को भारत में निर्मित विमान को सिविल ऑपरेटरों को बेचने और उन देशों को निर्यात करने की अनुमति दी जाएगी, जिन्हें भारत सरकार द्वारा मंजूरी दी गई है।

रोजगार सृजन

टाटा कंसोर्टियम ने सात राज्यों में फैले 125 से अधिक इन-कंट्री एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओं की पहचान की है। यह देश के एयरोस्पेस पारितंत्र में रोजगार सृजन में एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा और उम्मीद है कि सीधे 600 उच्च कुशल रोजगार, 3,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार और 3,000 अतिरिक्त मध्यम कौशल रोजगार के अवसर के साथ भारत के एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में 42.5 लाख से अधिक ‘काम के घंटे’ पैदा होंगे। लगभग 240 इंजीनियरों को स्पेन में एयरबस सुविधा में प्रशिक्षित किया जाएगा।

रक्षा विभाग के विशेष कार्य अधिकारी अरमाने गिरिधर, वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल संदीप सिंह, महानिदेशक (अधिग्रहण) पंकज अग्रवाल और रक्षा मंत्रालय और वायुसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उपस्थित थे।

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