मार्च 13, 2026

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने “अवैध लोन ऐप” पर बैठक की अध्यक्षता की

ऐसे अवैध लोन ऐप के संचालनों को रोकने के लिए अनेक कदम रेखांकित किए गए

केन्द्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल नियमित बैंकिंग चैनलों से बाहर “अवैध लोन ऐप” से संबंधित विभिन्न विषयों पर विचार करने के लिए हुई बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक में वित्त सचिव, आर्थिक कार्य सचिव, राजस्व सचिव तथा कॉरपोरेट कार्य (अतिरिक्त प्रभार) सचिव, वित्तीय सेवा सचिव, इलैक्ट्रॉनिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी सचिव, भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर तथा कार्यकारी निदेशक शामिल हुए।

वित्त मंत्री ने अवैध लोन ऐप के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की, विशेष रूप से कमजोर और निम्न आय के वर्ग के लोगों को ऊंची ब्याज दरों तथा प्रोसेसिंग/छिपे हुए शुल्कों पर ऋण/माइक्रो क्रेडिट की पेशकश करने वाले अवैध लोन ऐप तथा उनके द्वारा ब्लैकमेलिंग, आपराधिक धमकी जैसे वसूली व्यवहारों पर चिंता व्यक्त की।

सीतारमण ने मनी लॉन्ड्रिंग, कर चोरी, डेटा उल्लंघन तथा अनियमित भुगतान एग्रीग्रेटरों, मुखौटा कम्पनियों, निष्क्रिय गैर-बैकिंग वित्तीय कम्पनियों आदि के दुरुपयोग की संभावना का भी उल्लेख किया।

मामले के वैध, प्रक्रिया तथा तकनीक से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद बैठक में यह निर्णय लिया गया किः

  • भारतीय रिजर्व बैंक सभी वैध ऐप का “श्वेत सूची” तैयार करेगा तथा इलैक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यह सुनिश्चित करेगा की ऐप स्टोरों पर केवल ऐसे “श्वेत सूची” वाले ऐप ही होस्ट किए जाएं।
  • भारतीय रिजर्व बैंक मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल होने वाले वर्ण संकर/ किराए के खातों की निगरानी करेगा और निष्क्रिय गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों की समीक्षा करेगा/रद्द करेगा ताकि दुरुपयोग नहीं हो सके।
  • भारतीय रिजर्व बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि एक समय सीमा के अंदर भुगतान एग्रीग्रेटरों का पंजीकरण हो और उसके बाद किसी भी गैर-पंजीकृत भुगतान एग्रीग्रेटर को कार्य करने की अनुमति न हो।
  • कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय मुखौटा कम्पनियों को चिन्हित करेगा और दुरुपयोग रोकने के लिए उनका पंजीकरण समाप्त करेगा।
  • उपभोक्ताओं, बैंक कर्मचारियों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा अन्य हितधारकों के लिए साइबर जागरूकता में वृद्धि के उपाए किए जाने चाहिए।
  • ऐसे अवैध लोन ऐप के संचालनों को रोकने के लिए सभी मंत्रालय/एजेंसियां सभी संभव कदम उठाएंगी।

वित्त मंत्रालय नियमित आधार पर परिपालन के लिए कार्रवाई करने योग्य बिन्दुओं की निगरानी करेगा।

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