मार्च 8, 2026

सोलन ज़िला में आपदा से निपटने की तैयारियों पर मैगा मॉक ड्रिल का आयोजन

उपायुक्त ने अभियान के सफल संचालन के लिए सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया

उपायुक्त एवं अध्यक्ष ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मनमोहन शर्मा की अध्यक्षता में प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों के दृष्टिगत आज पूरे प्रदेश सहित सोलन ज़िला में भी मैगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। ज़िला में सभी उपमण्डलों में पांच स्थानों पर बाढ़, भूस्खलन व अमोनिया गैस रिसाव जैसी आपदा के दौरान प्रभावित लोगों को बचाने एवं राहत कार्यों का पूर्वाभ्यास किया गया।

आज मॉक एक्सरसाइज़ के दौरान प्रातः 09.10 बजे भारी वर्षा के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अर्की में धरातल तल पर बाढ़ का पानी घुसने का परिदृश्य तैयार किया गया। सूचना मिलते ही उपमण्डलाधिकारी (ना.) के नेतृत्व में बचाव दल के सदस्यों ने मौके पर पहंुचकर बचाव अभियान शुरू किया।
कसौली उपमण्डल में प्रातः 10.11 बजे कुमारहट्टी-नाहन सड़क पर बैकुन्ठ होम-स्टे के समीप डगशाई पहाड़ी से भूस्खलन होने की स्थिति निर्मित की गई और उसके अनुरूप सम्बन्धित विभागों को राहत एवं बचाव कार्यों में संलग्न किया गया।
कण्डाघाट उपमण्डल में प्रातः 09.23 बजे भारी वर्षा के कारण अश्वनी खड्ड में बाढ़ आने से साधुपुल में लोगों के फंसे होने की परिस्थिति दर्शाई गई और राहत एवं बचाव दलों द्वारा इनके बचाव के लिए पूर्वाभ्यास किया गया।
नालागढ़ उपमण्डल में प्रातः 10.23 बजे बद्दी में स्थित वर्द्धमान ऑरो टेक्सटाईल लिमिटिड में अमोनिया गैस रिसाव की घटना निर्मित की गई। सूचना मिलते ही आपदा मोचन बल एवं स्थानीय प्रशासन ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत व बचाव कार्य का पूर्वाभ्यास किया। इसके अतिरिक्त प्रातः 10.30 बजे बाल्द नदी में भारी वर्षा के कारण पानी का स्तर बढ़ जाने से पुल क्षतिग्रस्त होने का परिदृश्य तैयार किया गया।
सोलन उपमण्डल में प्रातः 09.50 बजे शामती में भूस्खलन की घटना में बड़े स्तर पर लोगों के फंसे होने की स्थिति निर्मित की गई। इसके लिए स्टेजिंग एरिया ठोडो मैदान से बचाव दल एवं आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सहित बचाव कार्यों का पूर्वाभ्यास किया गया।
उपायुक्त ने कहा कि इस मैगा मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी भी प्राकृतिक अथवा अन्य आपदा की स्थिति में कम से कम समय में मौके पर पहंुचकर बचाव कार्यों की तैयारियां परखना है। उन्होंने कहा कि प्रथम रिस्पोंडर से लेकर विभिन्न विभागों में आपसी समन्वय, आवश्यकता पड़ने पर एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की तैनाती, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना, घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए स्वास्थ्य शिविर व अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने और बचाव दलों को आवश्यक उपकरण एवं मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का अभ्यास इस दौरान किया गया। राहत दलों द्वारा प्रभावितों के खान-पान की उचित व्यवस्था की भी परख की गई।
उपायुक्त ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्यों को अंजाम दिया गया। उन्होंने बताया कि उपायुक्त रिसपांेसिबल ऑफिसर, अतिरिक्त उपायुक्त इंसीडेंट कमाण्डर के रूप में तैनात रहे और उनके साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सेफ्टी ऑफिसर, सहायक आयुक्त लाईज़न ऑफिसर तथा ज़िला लोक सम्पर्क अधिकारी सूचना एवं मीडिया ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे। इसके अतिरिक्त उपमण्डल स्तर पर सभी एसडीएम ऑपरेशन सेक्शन चीफ की भूमिका थे और उनके साथ तहसीलदार, आदेशक गृह रक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी व उनकी टीम तथा क्षेत्रीय प्रबंधक हिमाचल पथ परिवहन निगम तैनात रहे। ज़िला में प्लानिंग सेक्शन चीफ की भूमिका राजस्व अधिकारी और लॉजिस्टिक सेक्शन यूनिट की जिम्मेवारी परियोजना अधिकारी डी.आर.डी.ए. के पास रही।
मनमोहन शर्मा ने कहा कि पूर्वाभ्यास के उपरांत एन.डी.एम.ए. के साथ डी-ब्रीफिंग के दौरान इस अभियान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इस पूर्वाभ्यास के सफल आयोजन के लिए उन्होंने सभी स्वयंसेवियों, स्थानीय लोगों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों, मीडिया प्रतिनिधियों सहित आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से जुड़े हितधारकों का आभार व्यक्त किया है।

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